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किसान और कमेरे

सर छोटूराम किसान और कमेरे (वैसे तो मेघों और जाटों के संघर्ष का एक अध्याय भी है जो काफी पुराना है. लेकिन अब तक वह संघर्ष जमीन के मालिकों और कमेरों के बीच सहयोग और परस्पर निर्भरता मेँ बदल चुका है. जाति के तौर पर भले ही वे अलग-अलग हों लेकिन कृषि और संबद्ध कार्यों के कारण उनकी समस्याएँ आपस मेँ जुडी हैं. अच्छी फसल से या खराब फसल से वे समान रूप से प्रभावित होते हैं. सामाजिक उथल-पुथल को इन्होंने संयुक्त रूप से और अलग-अलग झेला है. पिछले दिनों फेसबुक पर राकेश सांगवान की वॉल पर उनका एक आलेख पढ़ने को मिला. इसमें सर छोटूराम के विचारोँ के आधार पर दलितों और जाटों के धर्म सहित कई साझा संकटों पर भी प्रकाश डाला गया है. अभी तक मेघनेट पर जो लिखा है वह मेघ sensibility की दृष्टि से लिखा गया है. प्रस्तुत आलेख जाट दृष्टिकोण पर पर्याप्त रूप से प्रकाश डालता है. राकेश सांगवान ने इसे मेघनेट पर प्रकाशित करने की अनुमति दी है इसके लिए उनका आभार.) "तुम अगर बिछड़े रहो तो चंद कतरे ही फकत अगर मिल जाओ तो बिफरा हुआ तूफान हो तुम" हमारे देश में जाति आधार पर जनगणना आखिरी बार 1931 में हुई थी. उस वक़्त भारत मे...

खाप V/S कोर्ट

1-खाप में लगभग 20 आदमियो से लेकर 200 आदमी तक सुनवाई के बाद फैसला देते है,     जिसे पहले गांव स्तर पर    फिर तपा स्तर पर     फिर खाप स्तर पर और    फिर सर्वखाप स्तर पर चुनोतियाँ दी जा सकती है,    बल्कि    कोर्ट में एक आदमी बैठता है, अगर उसका मूड खराब है तो गई भैंस पानी मे। 2- खाप सिस्टम में अपराधी को नही अपराध को खत्म करके भाईचारा स्थापित करने पर जोर दिया जाता है     बल्कि     कोर्ट में आपस मे फांसी उम्रकैद करवा के दुश्मनी पक्की करवाई जाती है। 3- खाप में अगर 200 आदमी आ रहे है तो उनकी कोई फीस नही होती जबकि खाना पीना भी नही होता,     बल्कि     कोर्ट में मुकदमो में खर्चो पर इंसान को किडनी तक बेचनी पड़ सकती है, यहां भूखे पेट भजन ना होयो, 4- खाप सिस्टम में अपराधी समाज की आंखों में शर्मशार हो जाता है,     बल्कि     उसे जेल भेज कर कोर्ट उसको पक्का उघाड़ा बना देती है, 5- चाऊमीन वाला बयान देने वाले कि इज़्ज़त उतार ली थी खाप ने, वो इंसान आज तक सामने नही आया, ...

21 सिख जाट vs 12000 अफगानी सैनिक, सन 1897(सारागढ़ी का युद्ध)

आपने ग्रीक सपार्टा और परसियन की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा। इनके ऊपर हॉलिवुड में 300 नामक फिल्म भी बनी है। भारतीय युद्ध इतहास में चार महान (खास तौर से) लड़ाई भारत माँ के बहादुर बेटो मातृभूमि की रक्षा में लड़ी हैं! लेकिन अगर आप सारागढ़ी के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा की दुनिया की महानतम लड़ाई  भारतीय सेना की 36 सिख रेजिमेंट के 21 जबाज़ों ने 12 हज़ार अफगानी पश्तून लड़ाकों से लड़ी थी! बात 1897 की है। नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानोँ ने हमला कर दिया। वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे। इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिँह ने बनवाया था। इन किलोँ के पास सारागढी मेँ एक सुरक्षा चौकी थी। जंहा पर 36 वीँ सिख रेजिमेँट के 21 जवान तैनात थे। ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे। 36 वीँ सिख रेजिमेँट मेँ केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे। ईशर सिँह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानोँ को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानोँ से जिँदा बचना नामुमकिन है। फिर भी इन जवानोँ ने लड़ने का फैसला लिया। और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैँड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुय...

जय यौद्धेय

झूठ नहीं थे जाट लुटेरे जो तारीख के पाठाँ में लूटण खातर ताकत चाहिए जो थी बस जाटाँ में„ सोमनाथ के मंदिर का सब धरया ढका उघाड लेग्या मोहम्मद गजनी लूट मचाकै जब सारा सौदा पाड लेग...

1191 में हरियाणे के वीर जाट यौद्धा जाटवान सिंह मलिक की कुछ यादे। जय जाट

1191 में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच युद्ध हुआ।इस युद्ध में जाटो ने पृथ्वीराज जी का पूरा साथ दिया।गौरी हार गया पर दोबारा उसने 1192 में हमला कर दिया जिसमें जयचंद राठौड़...

जाटों की धर्मशालाएं, भवन एवं मंदिर

जाट धर्मशालाएं→ . 1. जाट धर्मशाला कोलायत (बीकानेर) राज. 2. जाट धर्मशाला पुष्कर (अजमेर) राज. 3. जाट धर्मशाला खिडग़ी (टारेंक) राज. 4. जाट धर्मशाला भरतपुर राज. 5. जाट धर्मशाला डिग्गी (टोंक) र...

जाट बटालियन

3 नम्बर जाट बटालियन का डोगराई पर अधिकार - डोगराई गांव में पाकिस्तान के लगभग एक ब्रिगेड का जमाव (defence) था। उन्होंने चारों ओर कांटेदार तार एवं बारूदी सुरंगें लगा रखी थीं और 18 मशीनगन...

माता भाग कौर(माई भागो)-

एक महान योद्धा औरत जिन्हे हिंदुस्तान की धरती पर सबसे बहादुर औरत कहा गया है जिन्होंने मुठी भर जाट सिखों का नेतृत्व करके कई बार मुग़लो+राजपूतो की बड़ी बड़ी सेनाओ को हराया-आप...

जाट रेजीमेंट के बारे मे रोचक तथ्य | Jat Regiment Interesting Facts

स्थापना वर्ष:1795 आदर्श वाक्य: “संगठन व वीरता” युद्धघोष: “जाट बलवान जय भगवान” मुख्यालय: बरेली, उत्तरप्रदेश आकार: 23 बटालियन जाट रेजिमेंट भारतीय सेना की एक इंफेंट्री रेजिमेंट ...

राजा ईश्वरीसिंह को सहायता – बागडू (बागरू) का युद्ध (अगस्त, 1748 ई०)

21 सितम्बर, 1743 ई० को सवाई जयसिंह की मृत्यु के साथ ही उसके दोनों पुत्रों ईश्वरीसिंह और माधोसिंह के बीच उत्तराधिकार का युद्ध शुरु हो गया। माधोसिंह ने अपने मामा उदयपुर के महाराण...