चुरु की जगह था बास कालेर

जांगल प्रदेश मे 1488 से पहले जाट जनपद थे। काधल और बीका ने मिलकर उनके  राज्यो को धवस्त करके बीकानेर राजधानी बनायी।बीकानेर नरसिंह गोदारा की ज़मीन पर स्थापित हुआ।

काधल ने 1488 के ढाका युद्ध(सिद्धमुख गाँव राजगढ तहसिल चुरु जिला) मे 6 जनपदो की संयुक्त सेना पर सुर्योदय से पहले आक्रमण करके हराया और जाट गणराज्यो पर अधिकार जमाया।

काधल एक अंय युद्ध मे मारा गया। काधल का बेटा बाघ था जो झांसल युद्ध मे मारा गया। बाघ के बणीर था- बणीर ने मेलुसर (भालेरी के पास स्थित प्राचिन गाँव जिसकी स्थापना #मेलखजीसारण ने की) पर कब्जा किया फिर घांघु चला गया।

बणीर बुढ़ापे मे था उस समय खारिया गाँव मे भाटि राजपुत गाय चराने के लिए आये हुए थे। उन्होने अपनी बेटी की शादी बणीर के बेटे से करने के लिए नारियल भेजा। बणीर ने मज़ाक मे कहा इस उम्र मे मेरे लिए नारियल। यह सुनकर बणीर के बङे बेटे मेघ ने कहा नारियल और टीका बणीर को दो। बणीर की भाटी राजपुतनी से शादी कर दी।

रिवाज़ के अनुसार चुरु जो बाँस कालेर था उसके #चौधरी के भाटी  राजपुतनी को धर्म की बेटी बना दी। उस के चार बेटे हुए।

बणीर के मरने के बाद भाटी  राजपुतनी चौधरी के पास अपने चार बेटो के साथ रहने लगी।उस भाँटी राजपुतनी के बङे बेटे का नाम मालदेव था। मालदेव बङा होने के बाद चुरु पर कब्जा करने के लिए अपने धर्म के नाना और उनकी पुरी बिरादरी को भोज के लिए आमंत्रित किया। भोजशाला के नीचे बारुद्ध दबा दी।सभी को भोजशाला मे बैठाकर बारुद्ध मे विस्फोट कर मार डाला और कब्जा कर लिया।

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